आजकी पंक्तियाँ :  मुनीर मोमिन

आजकी पंक्तियाँ : मुनीर मोमिन

शाम का जादू हर सुब्ह जब मैं जागता हूँ मुझे शाम की ख़्वाहिश बेचैन करने लगती है और मैं काग़ज़ … Continue reading आजकी पंक्तियाँ : मुनीर मोमिन

Poems of Kabir : कबीर बानी

Poems of Kabir : कबीर बानी

मन मस्त हुआ तब क्यों बोले। हीरा पायो गाँठ गठियायो, बार बार वाको क्यों खोले। हलकी थी तब चढ़ी तराजू, … Continue reading Poems of Kabir : कबीर बानी

आज की पंक्तियाँ

उर्दू से लिप्यंतरण : मुमताज़ इक़बाल मुनीर मोमिन सुपरिचित, सम्मानित और समकालीन बलोची कवि हैं। उनकी यहाँ प्रस्तुत बलोची नज़्में उनके … Continue reading आज की पंक्तियाँ

आज का चुनिंदा अशआर : साक़ी फ़ारूक़ी

हद-बंदी-ए-ख़िज़ाँ = setting limits of autumn, हिसार-ए-बहार = circle of spring रक़्स = dance Continue reading आज का चुनिंदा अशआर : साक़ी फ़ारूक़ी

चुनिंदा अशआर : ज़ेहरा निगाह

चुनिंदा अशआर : ज़ेहरा निगाह

मय-ए-हयात में शामिल है तल्ख़ी-ए-दौराँ जभी तो पी के तरसते हैं बे-ख़ुदी के लिए मय-ए-हयात = wine of existence, तल्ख़ी-ए-दौराँ … Continue reading चुनिंदा अशआर : ज़ेहरा निगाह

कुछ चुने हुए शेर : मरग़ूब अली

कुछ चुने हुए शेर : मरग़ूब अली

हर्फ़ नाकाम जहाँ होते हैं उन लम्हों में फूल खिलते हैं बहुत बात के सन्नाटे में .. लब पर उगाऊँ … Continue reading कुछ चुने हुए शेर : मरग़ूब अली

गज़ल : आदिल रज़ा मंसूरी

गज़ल : आदिल रज़ा मंसूरी

चाँद तारे बना के काग़ज़ पर ख़ुश हुए घर सजा के काग़ज़ पर बस्तियाँ क्यूँ तलाश करते हैं लोग जंगल … Continue reading गज़ल : आदिल रज़ा मंसूरी

जे़हनों में ख़याल जल रहे हैं

जे़हनों में ख़याल जल रहे हैं

जे़हनों में ख़याल जल रहे हैं जे़हनों में ख़याल जल रहे हैंसोचों के अलाव-से लगे हैं अलाव = bonfire दुनिया … Continue reading जे़हनों में ख़याल जल रहे हैं

जिसे लिखता है सूरज : निदा फ़ाज़ली

जिसे लिखता है सूरज : निदा फ़ाज़ली

जिसे लिखता है सूरज वो आयी! और उसने मुस्कुरा के मेरी बढ़ती उम्र के सारे पुराने जाने अनजाने बरस पहले … Continue reading जिसे लिखता है सूरज : निदा फ़ाज़ली

गज़ल – निदा फ़ाज़ली

गज़ल – निदा फ़ाज़ली

सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना  जो साथ है वही घर का … Continue reading गज़ल – निदा फ़ाज़ली

कुछ चुने हुए शेर, ग़ज़ल – राहत इंदौरी

कुछ चुने हुए शेर, ग़ज़ल – राहत इंदौरी

मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए * ये ज़रूरी है … Continue reading कुछ चुने हुए शेर, ग़ज़ल – राहत इंदौरी

कुछ अशआर, नज़्म – निदा फ़ाज़ली

कुछ अशआर, नज़्म – निदा फ़ाज़ली

यूँ लग रहा है जैसे कोई आस-पास है वो कौन है जो है भी नहीं और उदास है  मुमकिन है लिखने … Continue reading कुछ अशआर, नज़्म – निदा फ़ाज़ली

मेरा सफ़र.  –  अली सरदार जाफ़री

मेरा सफ़र. – अली सरदार जाफ़री

हमचू सब्ज़ा बारहा रोईदा-ईम (हम हरियाली की तरह बार-बार उगे हैं) रूमी … फिर इक दिन ऐसा आएगा आँखों के … Continue reading मेरा सफ़र. – अली सरदार जाफ़री

ग़ज़ल – साहिर देहल्वी ( સરળ ગુજરાતી સમજૂતી સાથે )

ग़ज़ल – साहिर देहल्वी ( સરળ ગુજરાતી સમજૂતી સાથે )

दरमियान-ए-जिस्म-ओ-जाँ है इक अजब सूरत की आड़ मुझ को दिल की दिल को है मेरी अनानियत की आड़ आ गया … Continue reading ग़ज़ल – साहिर देहल्वी ( સરળ ગુજરાતી સમજૂતી સાથે )

ज़िन्दगी से उन्स है – साहिर लुधियानवी

ज़िन्दगी से उन्स है – साहिर लुधियानवी

ज़िन्दगी से उन्स है     उन्स- प्रेम हुस्न से लगाव है धड़कनों में आज भी इश्क़ का अलाव है … Continue reading ज़िन्दगी से उन्स है – साहिर लुधियानवी

जश़्ने सुख़नगोई, ब्लोग के पाँचवे जन्मदिन पर…

जश़्ने सुख़नगोई, ब्लोग के पाँचवे जन्मदिन पर…

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो ( मेयारी – qualitative) … Continue reading जश़्ने सुख़नगोई, ब्लोग के पाँचवे जन्मदिन पर…

સાલમુબારક. બ્લોગની પાંચમી વર્ષગાંઠ નિમિત્તે…

સાલમુબારક. બ્લોગની પાંચમી વર્ષગાંઠ નિમિત્તે…

મારા બ્લોગના વાચકમિત્રો, આ ઉજવણી તમારા સૌની પ્રત્યે ખરા દિલથી આભાર વ્યક્ત કર્યા વિના અધૂરી છે. એવું લાગે છે કે … Continue reading સાલમુબારક. બ્લોગની પાંચમી વર્ષગાંઠ નિમિત્તે…

गज़ल – क़तील शिफ़ाई

गज़ल – क़तील शिफ़ाई

अपने होंटों पर सजाना चाहता हूँ आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ कोई आँसू तेरे दामन पर गिरा कर बूँद … Continue reading गज़ल – क़तील शिफ़ाई

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस – सलीम कौसर

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस – सलीम कौसर

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस तुम सच हो बाक़ी जो है फ़साना है और बस लोगों को … Continue reading मिलना न मिलना एक बहाना है और बस – सलीम कौसर

कुछ चुने हुए शेर : ​सलीम कौसर

कुछ चुने हुए शेर : ​सलीम कौसर

बिछड़ती और मिलती साअतों के दरमियान इक पल यही इक पल बचाने के लिए सब कुछ गँवाया है     … Continue reading कुछ चुने हुए शेर : ​सलीम कौसर

कुछ चुने हुए शेर:​ सूर्यभानु गुप्त

कुछ चुने हुए शेर:​ सूर्यभानु गुप्त

जिनके नामों पे आज रस्ते हैं वे ही रस्तों की धूल थे पहले …… अन्नदाता हैं अब गुलाबों के जितने … Continue reading कुछ चुने हुए शेर:​ सूर्यभानु गुप्त

नज़्म –  अमीक़ हनफ़ी (સરળ ગુજરાતી ભાવાનુવાદ સાથે)

नज़्म – अमीक़ हनफ़ी (સરળ ગુજરાતી ભાવાનુવાદ સાથે)

ज़ात का आईना-ख़ाना जिस में रौशन इक चराग़-ए-आरज़ू चार-सू ज़ाफ़रानी रौशनी के दाएरे मुख़्तलिफ़ हैं आईनों के ज़ाविए एक लेकिन … Continue reading नज़्म – अमीक़ हनफ़ी (સરળ ગુજરાતી ભાવાનુવાદ સાથે)

कुमार पाशी – चुनिंदा अशआर

कुमार पाशी – चुनिंदा अशआर

हवा के रंग में दुनिया पे आश्कार हुआ मैं क़ैद-ए-जिस्म से निकला तो बे-कनार हुआ आश्कार = clear, manifest, visible, … Continue reading कुमार पाशी – चुनिंदा अशआर

તારે નામે લખું છું – કુમાર પાશી

તારે નામે લખું છું – કુમાર પાશી

તારે નામે લખું છું તારે નામે લખું છું: સિતારા, પતંગિયાં, આગિયા તારા રસ્તાઓ સીધા સરળ હોય એના પર છાયા હોય … Continue reading તારે નામે લખું છું – કુમાર પાશી

ग़ज़ल – दुष्यंत कुमार

ग़ज़ल – दुष्यंत कुमार

कुछ चुनिंदा अशआर : सिर्फ़ शाइ’र देखता है क़हक़हों की असलियत हर किसी के पास तो ऐसी नज़र होगी नहीं … Continue reading ग़ज़ल – दुष्यंत कुमार

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक –  मिर्ज़ा ग़ालिब

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक – मिर्ज़ा ग़ालिब

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक (A prayer needs … Continue reading आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक – मिर्ज़ा ग़ालिब

बशीर बद्र  (रोशनी के घरौंदे)

बशीर बद्र (रोशनी के घरौंदे)

  शाम आँखों में, आँख पानी में और पानी सराए-फ़ानी में झिलमिलाते हैं कश्तियों में दीए पुल खड़े सो रहे … Continue reading बशीर बद्र (रोशनी के घरौंदे)

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

धूप की चादर मिरे सूरज से कहना भेज दे गुर्बतों का दौर है जाड़ों की शिददत है बहुत …… उन … Continue reading चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का – जिगर मुरादाबादी

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का – जिगर मुरादाबादी

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है ये किस का तसव्वुर है ये … Continue reading इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का – जिगर मुरादाबादी

मिली हवाओं में उड़ने की – वसीम बरेलवी

मिली हवाओं में उड़ने की – वसीम बरेलवी

मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारो के मैं ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारो वो बेख़याल मुसाफ़िर … Continue reading मिली हवाओं में उड़ने की – वसीम बरेलवी

रात पहाड़ों पर कुछ और ही होती है…

रात पहाड़ों पर कुछ और ही होती है… रात पहाड़ों पर कुछ और ही होती है… आस्मान बुझता ही नहीं, … Continue reading रात पहाड़ों पर कुछ और ही होती है…

उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता

उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता हमेशा हो सितारा हम-सफ़र आसाँ नहीं होता जो आँखों ओट है चेहरा उसी को … Continue reading उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता

ग़ज़ल – मुसव्विर सब्ज़वारी

कोई ख़्वाब सर से परे रहा ये सफ़र सराब-ए-सफ़र रहा मैं शनाख़्त अपनी गँवा चुका गई सूरतों की तलाश में … Continue reading ग़ज़ल – मुसव्विर सब्ज़वारी

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ – निदा फ़ाज़ली

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा कुछ होता … Continue reading देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ – निदा फ़ाज़ली

ग़ज़ल – दाग़ देहलवी

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता दाग़ देहलवी काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है … Continue reading ग़ज़ल – दाग़ देहलवी

कबीर बानी-Poems of Kabir

कबीर बानी-Poems of Kabir

मुरली बजत अखंड सदा से, तहाँ प्रेम झनकारा है। प्रेम-हद तजी जब भाई, सत लोक की हद पुनि आई। उठत … Continue reading कबीर बानी-Poems of Kabir

ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं

ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं

ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं तू आबजू इसे समझा अगर तो चारा नहीं तिलिस्म-ए-गुंबद-ए-गर्दूं को तोड़ … Continue reading ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं

दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है

दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है नोक-ए-ख़ंजर ही बताएगी कि ख़ूँ कितना है आँधियाँ आईं तो सब लोगों … Continue reading दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है

ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई

ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई जिंदगी की तड़प बढ़ाई गई आईने से बिगड़ … Continue reading ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई

ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा -गुलज़ार

ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा काफ़िला साथ और सफ़र तन्हा रात भर तारे बातें करते … Continue reading ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा -गुलज़ार

निदा फ़ाज़ली – चुनिंदा अशआर

ज़िन्दगी की सच्चाइयों को खूबसूरती से पेश करनेवाले निदा फ़ाज़ली मेरी नज़र में उजालों के , उम्मीदों के शायर है … Continue reading निदा फ़ाज़ली – चुनिंदा अशआर

अहमद फ़राज़ – ख़्वाब मरते नहीं

ख़्वाब मरते नहीं ख़्वाब मरते नहीं ख़्वाब दिल हैं न आँखें न साँसे कि जो रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जाएँगे … Continue reading अहमद फ़राज़ – ख़्वाब मरते नहीं

अहमद फ़राज़ – चुनिंदा अशआर

चुनिंदा अशआर शायद कोई ख्वाहिश रोती रहती है मेरे अन्दर बारिश होती रहती है। …. मैं चुप रहा तो सारा … Continue reading अहमद फ़राज़ – चुनिंदा अशआर

ग़ज़ल –  Ghazal  –  कैफ़ी आज़मी

ग़ज़ल – Ghazal – कैफ़ी आज़मी

ग़ज़ल मैं ढूँढता हूँ जिसे वह जहाँ नहीं मिलता नयी ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता नयी ज़मीन नया आसमाँ भी … Continue reading ग़ज़ल – Ghazal – कैफ़ी आज़मी

कुछ चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (2)

कुछ चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (2)

हम भी दरया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा ……….. जिस दिन … Continue reading कुछ चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (2)

मीर तक़ी मीर

मीर तक़ी मीर  (1722-23  –   1810) उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ‘ ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता … Continue reading मीर तक़ी मीर

चांद और सितारे – इकबाल – The Moon and The Stars

चांद और सितारे डरते-डरते दमे-सहर से तारे कह्ने लगे क़मर से नज़ारे रहे वही फ़लक पर हम थक भी गये … Continue reading चांद और सितारे – इकबाल – The Moon and The Stars

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की शायरी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की शायरी

मुलाक़ात यह रात उस दर्द का शजर है जो मुझसे तुझसे अज़ीमतर है अज़ीमतर है कि उसकी शाख़ों में लाख … Continue reading फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की शायरी

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (1)

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (1)

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए । – … Continue reading चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (1)

ज़िंदगी – मोहम्मद इक़बाल

बरतर अज़ अंदेशा-ए-सूदो-ज़ियां है ज़िंदगी है कभी जां और कभी तस्लीमे-जां है ज़िंदगी । तू इसे पैमाना-ए-इमरोज़ो-फ़रदा से न नाप … Continue reading ज़िंदगी – मोहम्मद इक़बाल

મિર્ઝા ગાલિબ — હરીન્દ્ર દવે (2)

‘ હૈ કહાં તમન્નાકા દૂસરા કદમ સાકી ? હમને દશ્તે-ઇમ્કાંકો એક નક્શે-પા પાયા.’ મારી કામનાનું બીજું ચરણ ક્યાં છે, ઓ … Continue reading મિર્ઝા ગાલિબ — હરીન્દ્ર દવે (2)

મિર્ઝા ગાલિબ — હરીન્દ્ર દવે (1)

ગાલિબ એટલે વિજયી- જેનું વર્ચસ્વ પ્રવર્તતું હોય એવી વ્યક્તિ.ગાલિબનું નામ મિર્ઝા અસદુલ્લાહબેગ ખાં લાડમાં એમને મિર્ઝા નૌશાને નામે પણ સૌ … Continue reading મિર્ઝા ગાલિબ — હરીન્દ્ર દવે (1)