ચૂંટેલા શેર – જવાહર બક્ષી

અટકવું એ ય ગતિનું જ કોઈ રૂપ હશે! હું સા….વ સ્થિર છું, મારામાં રાસ ચાલે છે …. સાંભળું, જોઉં કે ધારું તો કરી દે ધુમ્મસ ઓગળી જાઉં તો ભીનાશમાં ઝાલે છે મને …. કોઈ આકાશી અધૂરપ લોહીમાં ઘૂમરાય છે જાણે ભૂખરાં વાદળોને પાથરું છું શ્વાસમાં …. અંધ જગતને હું નહિ આંજું સાંઈ વેશ નહીં, વૃત્તિ…

I Have a Melody in my Pulse

Her poems are intense, palpable, strong sensory experiences, you are travelling with her, chasing evening shadows in the long corridors of an asylum, breathing in a sea, entering inside an abandoned church, drenched in rains! ……… ……… ………. ……. Deepti Naval is an acclaimed actress, also a painter and photographer. She enjoys trekking in the…

सूर्य ग्रहन

मेरे भीतर से उठ रहा है ख़लाओं का काला चाँद ढक रहा है मेरे सूरज को धीरे धीरे रंगों भरा जीवन बदल रहा है सेपिया तसवीर और फिर धीरे धीरे ब्लेक एंड व्हाइट सोचती हूँ बन जाऊं एक स्फ़टिक का प्रिज़्म कहीं से ढूँढ लाउँ एक उजली सफेद किरण जो रंगों से भर दे मेरे…

मख़मली ढलानों पर – दीप्ति नवल

मख़मली ढलानों पर मख़मली ढलानो पर आख़िरी आवाज़ थम चुकी है चरवाहे की दिन है कि दबे पांव गुज़र रहा है करीब से सफेद चोटियों पे रंग बिखेर रही है शफक नर्म हवाओं से गूंजती वादीमें कहीं कच्चे रास्ते है, कहीं पानी की जैसे गलियां सी और खेल रही है गलियों में डूबते हुए सूरज…

अहसास – आशमा कौल

आसमान जब मुझे अपनी बाँहों में लेता है और ज़मीन अपनी पनाहों में लेती है मैं उन दोनों के मिलन की कहानी लिख जाती हूँ, श्वास से क्षितिज बन जाती हूँ । दिशाएँ जब भी मुझे सुनती हैं हवाएँ जब भी मुझे छूती हैं मैं ध्वनि बन फैल जाती हूँ और छुअन से अहसास हो…

Neera Poems – Sunil Gangopadhyay

This Scene Your chin on your knees, you sit there, blue striped sari In a dream your hair flowing on your back Countless butterflies in the air or are they all skyflowers Your chin on your knees, you sit there, your eyes Famously distant, a red glow on your toes On your right hand, the…

નિર્વાણષટકમ – આદિ શંકરાચાર્ય

मनौबुद्धिय् अंहकार चितानि नहम न च श्रोत्रः जि्व्हे न च घ्रणा नेत्र न च व्योम भुमिर न तेजो न वायु चिदानन्द रुपाः शिवोहं शिवोहं I am neither the mind, nor the intellect, nor the ego, nor the mind-stuff; I am neither the body, nor the changes of the body; I am neither the senses of…

‘મોનેર માનુષ’ – સુનીલ ગંગોપાધ્યાય

આ પુસ્તકનું વિષયવસ્તુ એક સરળ અને આધ્યાત્મિક વ્યક્તિના જીવન પર આધારિત છે, જે લાલન ફકીર તરીકે ઓળખાતા સંસારી ભજનિક હતા.એમની ચોક્કસ જન્મતારીખ મળતી નથી, પણ મૃત્યુ ૧૮૯૦માં થયેલું ગણાય છે. એ બંગાળમાં જન્મ્યા, રહ્યા, મૃત્યુ પામ્યા. આપણી બાજુ એમની કોઈ ઓળખાણ કદાચ છે નહીં, પરંતુ બંગાળમાં, અને બાંગ્લાદેશમાં આજે પણ એમની ઘણી લોકપ્રિયતા છે. સંત…

एक शाम – अनुपमा चौहान

बिखरे हुये लम्हों की लडी बना ली है जब चाहे गले मे डाल ली जब चाहे उतार दी झील का सारा पानी उतर आया आँखों में न जाने कितनी गागर खाली हैं तैरता था उसमें तिनका कोई जो यूँ ही आँखों छलक गया कभी हौले से उतरूँ सैलाब की रवानियों में कि मेरी गागर अभी…