The Journey – Mary Oliver

The Journey One day you finally knew what you had to do, and began, though the voices around you kept shouting their bad advice— though the whole house began to tremble and you felt the old tug at your ankles. “Mend my life!” each voice cried. But you didn’t stop. You knew what you had…

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When Death Comes -Mary Oliver

When Death Comes When death comes like the hungry bear in autumn; when death comes and takes all the bright coins from his purse to buy me, and snaps the purse shut; when death comes like the measle-pox; when death comes like an iceberg between the shoulder blades, I want to step through the door…

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कुछ चुने हुए शेर:​ सूर्यभानु गुप्त

जिनके नामों पे आज रस्ते हैं वे ही रस्तों की धूल थे पहले …… अन्नदाता हैं अब गुलाबों के जितने सूखे बबूल थे पहले …… मूरतें कुछ निकाल ही लाया पत्थरों तक अगर गया कोई ……. यहाँ रद्दी में बिक जाते हैं शाइर गगन ने छोड़ दी ऊँचाइयाँ हैं कथा हर ज़िंदगी की द्रोपदी-सी बड़ी…

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Do Not Stand At My Grave And Weep – અનુવાદ: વિવેક મનહર ટેલર

Do Not Stand At My Grave And Weep Do Not Stand At My Grave And Weep I am Not there. I do not sleep. I am a thousands winds that blow. I am the diamond glints on snow. I am the sunlight on ripened grain. I am the gentle autumn rain. When you awaken in…

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हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ – सूर्यभानु गुप्त

हैज़ा, टी. बी.,चेचक से मरती थी पहले दुनिया मन्दिर, मसजिद, नेता, कुरसी हैं ये रोग अभी के ….. इक मोम के चोले में धागे का सफ़र दुनिया, अपने ही गले लग कर रोने की सज़ा पानी। …….. हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ मैं भी…

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Breathe Again – Ivan Donn Carswell

keeping a day ahead when space occupied by those preceding still reeks of waste is deemed vagrancy and planning non-events because your life depends on it does not explain why no demand exists in any case living in expectancy of a life-changing phone-call doesn’t bring order to the chaos surrounding you, so unleash suspense, be…

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The Song Of The Barren Orange Tree – Poem by Federico García Lorca

Woodcutter. Cut out my shadow. Free me from the torture of seeing myself fruitless. Why was I born among mirrors? The daylight revolves around me. And the night herself repeats me in all her constellations. I want to live not seeing self. I shall dream the husks and insects change inside my dreaming into my…

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नए गीत – फ़ेदेरिको गार्सिया लोर्का

नए गीत तीसरा पहर कहता है- मैं छाया के लिए प्यासा हूँ चांद कहता है- मुझे तारों की प्यास है बिल्लौर की तरह साफ़ झरना होंठ मांगता है और हवा चाहती है आहें मैं प्यासा हूँ ख़ुशबू और हँसी का मैं प्यासा हूँ चन्द्रमाओं, कुमुदनियों और झुर्रीदार मुहब्बतों से मुक्त गीतों का कल का एक…

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नई आवाज – रामधारी सिंह “दिनकर”

कभी की जा चुकीं नीचे यहाँ की वेदनाएँ, नए स्वर के लिए तू क्या गगन को छानता है ? [1] बताएँ भेद क्या तारे ? उन्हें कुछ ज्ञात भी हो, कहे क्या चाँद ? उसके पास कोई बात भी हो। निशानी तो घटा पर है, मगर, किसके चरण की ? यहाँ पर भी नहीं यह…

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પ્રેમ વિષે – જાગૃતિ ફડિયા

એક દી’ સખી હું અને દરિયો બેઠાં’ તા કંઈ વાતો કરતા, ગોઠવાઈ ગયું ત્યાં આવી કાળું વાદળ, ધીંગામસ્તી કરતાં કરતાં, મેં દરિયાને પૂછયું આકાશ, ક્ષિતિજ અને તારા વિષે અવિરત પ્રેમના કોઈ કારણ વિષે તેણે છોળો ઉડાડી કહ્યું મને સૂર્ય, ચંદ્ર અને તારા વિષે તે પૂછી બેઠો મને પ્રેમના કો’ કૌતુક વિષે અને હું કહી બેઠી…

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नज़्म – अमीक़ हनफ़ी (સરળ ગુજરાતી ભાવાનુવાદ સાથે)

ज़ात का आईना-ख़ाना जिस में रौशन इक चराग़-ए-आरज़ू चार-सू ज़ाफ़रानी रौशनी के दाएरे मुख़्तलिफ़ हैं आईनों के ज़ाविए एक लेकिन अक्स-ए-ज़ात; इक इकाई पर उसी की ज़र्ब से कसरत-ए-वहदत का पैदा है तिलिस्म ख़ल्वत-ए-आईना-ख़ाना में कहीं कोई नहीं सिर्फ़ मैं! मैं ही बुत और मैं ही बुत-परस्त! मैं ही बज़्म-ए-ज़ात में रौनक़-अफ़रोज़ जल्वा-हा-ए-ज़ात को देता…

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શગ રે સંકોરું – રમેશ પારેખ

શગ રે સંકોરું શગ રે સંકોરું મારા નામની તૂટે પડછાયાની ગીચોગીચ સાંકડ્યું નર્યું અજવાળું અજવાળું વાય શગ રે સંકોરું મારા નામની સગપણને કાંઠે હોડી નાંગરી સામે ઝાંખું રે ઝળુંબે મારું ગામ કેડીઓ કંડારું મારા ગામની શગ રે સંકોરું મારા નામની શબદો ખંખેરી દીધા ખેસથી કાંઈ લૂછી નાખ્યાં રે લીલાં વેણ ઝાંખની સોંસરી પાંપણ સંચરે એન…

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पंचभूतों ने जो मुझे सिखलाया – के० सच्चिदानंदन

धरती ने मुझे सिखलाया है- सब कुछ स्वीकारना सब कुछ के बाद सबसे परे हो जाना हर ऋतु में बदलना यह जानते हुए कि स्थिरता मृत्यु है चलते चले जाना है अन्दर और बाहर। अग्नि ने मुझे सिखलाया है- तृष्णा में जलना नाचते-नाचते हो जाना राख दुख से होना तपस्वी काली चट्टानों के दिल और…

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ગઝલ -સૌમ્ય જોશી

એનામાં હું ય માનતો થઈ જાઉં છું ત્યારે, મારામાં જ્યારે માનતો થઈ જાય છે ઈશ્વર. … લો ફરી વર્ષો પછીથી શાયરી કે’વાઈ ગઈ, મૌનની જાહોજલાલીઓ ફરી લૂંટાઈ ગઈ. તીવ્રતા બુઠ્ઠી થઈ ને ગાલગાના બંધનો, બેડીઓનો દેશ છે તે કરવતો ખોવાઈ ગઈ. એ જ લોકો, એ જ ગઝલો, એ જ અધૂરાં સ્વપ્ન બે, કેટલી ચીજોથી સાલી…

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कुआँ…नारी जीवन की अभिव्यक्ति / मधु गजाधर

कुआँ मैं एक कुआँ हूँ, गहरा कुआँ , मेरे अन्दर के अँधेरे में भी शांति है , शीतलता है ,… क्योंकि मैं जल से ओत प्रोत हूँ, जल… प्रेम का जल , अपनत्व का जल, ममता का जल, संस्कार का जल, श्रधा के समर्पण का जल, जल ही जल , चहुँ और मेरे जल ही…

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