करवटें लेंगे बूँदों के सपने : नागार्जुन

….. करवटें लेंगे बूँदों के सपने अभी-अभी  कोहरा चीरकर चमकेगा सूरज  चमक उठेंगी ठूँठ की नंगी-भूरी डालें   अभी-अभी  थिरकेगी पछिया बयार  झरने लग जायेंगे नीम के पीले पत्ते   अभी-अभी खिलखिलाकर हँस पड़ेगा कचनार  गुदगुदा उठेगा उसकी अगवानी में  अमलतास की टहनियों का पोर-पोर   अभी-अभी  करवटें लेंगे बूँदों के सपने  फूलों के अन्दर  फलों-फलियों के अन्दर   ~ नागार्जुन (1964) 

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उनको प्रणाम : नागार्जुन

उनको प्रणाम जो नहीं हो सके पूर्ण–काम मैं उनको करता हूँ प्रणाम ।  कुछ कंठित औ’ कुछ लक्ष्य–भ्रष्ट जिनके अभिमंत्रित तीर हुए; रण की समाप्ति के पहले ही जो वीर रिक्त तूणीर हुए ! उनको प्रणाम !  जो छोटी–सी नैया लेकर उतरे करने को उदधि–पार; मन की मन में ही रही¸ स्वयं हो गए उसी में निराकार ! उनको प्रणाम !  जो उच्च शिखर…

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