Sunshine – Gulzar

Sunshine

A golden sun shines

on floating islands

in the cosmos.

The rarefied mist

has slipped aside.

Your face

quivers in my palms.

The morning cupped

in my hands.

A soft refulgence

courses through

my whole being.

I have drunk in

the drops of light,

which had slipped

from your radiant soul

and suffused your lips.

Gulzar

(From ‘Autumn Moon’)

Translated by J P Das

____ _______ ______ _______

ख़लाओं में तैरते जज़ीरों पे चम्पई धूप देख कैसे बरस रही है
महीन कोहरा सिमट रहा है
हथेलियों में अभी तलक तेरे नर्म चेहरे का लम्स एेसे छलक रहा है
कि जैसे सुबह को ओक में भर लिया हो मैंने
बस एक मध्दम-सी रोशनी मेरे हाथों-पैरों में बह रही है

तेरे लबों पर ज़बान रखकर
मैं नूर का वह हसीन क़तरा भी पी गया हूँ
जो तेरी उजली धुली हुई रूह से फिसलकर तेरे लबों पर ठहर गया था

ख़लाओं – शून्य , जज़ीरों – द्वीप , लम्स – स्पर्श

गुलज़ार ( कुछ और नज़्में )

( posted on 3rd December 2016 on Nehal’ s World)

Advertisements