चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

धूप की चादर मिरे सूरज से कहना भेज दे गुर्बतों का दौर है जाड़ों की शिददत है बहुत …… उन अँधेरों में जहाँ सहमी हुई थी ये ज़मीं रात से तनहा लड़ा, जुगनू में हिम्मत है बहुत ……. तारों भरी पलकों की बरसायी हुई ग़ज़लें है कौन पिरोये जो बिखरायी हुई ग़ज़लें ……… पास से…

મોરપિચ્છ હજુ ખરતું નથી – નેહલ

હોઠો પર હવે પ્રેમનું ગીત સ્ફૂરતું નથી કદંબની ડાળે હવે કોઈ ઝૂલતું નથી મધુવનમાં કયાં ખોવાયા વેણુના સૂર યમુનાની ધારે ગીત હવે કોઈ વહેતું નથી માન્યું તમે વસાવીને સોનાની દ્વારકા કે ગોકુળ-વૃંદાવનમાં હવે કોઈ ઝૂરતું નથી ગોવર્ધન ધાર્યો ને સુદર્શન ચક્ર ધર્યું પણ રાધાના મનથી મોરપિચ્છ હજુ ખરતું નથી મોકલ્યા ઉધ્ધવજીને, અમોને સમજાયું કે ગોકુળીયું…

An Eternal bond!- Nehal

When I Spoke to the Sky; My journey to love ends in you! He covered me from all over Went into hiding behind a moon, stars, rainbows, clouds,…never showed his real face! When I told the wind; I dreamt to be with you! A strong companion,I see in you. He scattered me all over Taking…

सफ़र – नेहल

हरे दरख़्तो के चम्पई अंधेरोमें शाम के साये जब उतरते है रात की कहानी छेड देते है जुग्नूओं की महफ़िलमें। रात की रानी खुश्बू की सौगात से भर देती है यादों के मंज़र। तन्हाई कब तन्हा रह पाती है!? चाँद, सितारे, सपने मेरे साथी उगते, डूबते मेरे संग आकाश हो या हो मन का आँगन…

આજ અચાનક – રાવજી પટેલ

આજ અચાનક કલશોર ભરેલું વૃક્ષ કાનમાં ઝૂલે! પાળ તૂટેલા વ્હેળા શો આળોટું રસબસ. પારિજાતની ગંધ સરીખી તને ગોપવી લોચન ભીતરમાં રહી ખૂલે! પ્હેલાં જેમ થતું’તું… પરિતૃપ્ત એકાંત યાદથી, એવી… બસ એવી… કુંવારી શૈય્યાના જેવી તું… કેટકેટલું વીત્યું મુજને! હજી રક્તમાં વ્હેતો વ્યાધિ. અમથી અમથી મત્ત હવાની ઘૂમરી જેવી પ્હેલાં ઘરમાં જતી-આવતી. એક દિવસ ના મળ્યો?…

Sun rays- Nehal

The way Sun rays travel Through the green fog Creating Luminous pathways Admist The mountains Stream Trees And valleys My sparkling soul Chalks It’s journey Through This universe In an enchanting Dancing, swirling Lights Twinkling Sprinkling It’s Magic dust Of smile Love And kindness. Floating Higher Up, among clouds Reaching for the stars And slowly…

Ecstasy – Hayden Carruth

Ecstasy  For years it was in sex and I thought this was the most of it so brief a moment or two of transport out of oneself or in music which lasted longer and filled me with the exquisite wrenching agony of the blues and now it is equally transitory and obscure as I sit…

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का – जिगर मुरादाबादी

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है ये किस का तसव्वुर है ये किस का फ़साना है जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है दिल संग-ए-मलामत का हर-चंद निशाना है दिल फिर भी मिरा दिल है दिल ही तो ज़माना है हम इश्क़ के मारों का…

अब मैं लौट रही हूँ / अमृता भारती

अब कोई फूल नहीं रहा न वे फूल ही जो अपने अर्थों को अलग रख कर भी एक डोरी में गुँथ जाते थे छोटे-से क्षण की लम्बी डोरी में । अब मौसम बदल गया है और टहनियों की नम्रता कभी की झर गई है — मैं अनुभव करती हूँ बिजली का संचरण बादलों में दरारें…

कालान्तर – Then And Now

कैशोर्य के उन दिनों में मैं सुबह की ख़ुशियों से भर जाता था, पर शामों में रुदन ही रुदन था ; अब, जबकि मैं बूढ़ा हूँ हर दिन उगता है शंकाओं से आच्छन्न, तो भी इसकी सन्ध्याएँ पावन हैं, शान्त और प्रसन्न । कालान्तर / फ़्रेडरिक होल्डरलिन अमृता भारती द्वारा अनूदित …………………… Then And Now…