ग़ज़ल – दाग़ देहलवी

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता

दाग़ देहलवी

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काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है
मुझ को ख़बर नहीं मिरी मिट्टी कहाँ की है

सुन के मिरा फ़साना उन्हें लुत्फ़ आ गया
सुनता हूँ अब कि रोज़ तलब क़िस्सा-ख़्वाँ की है

पैग़ाम-बर की बात पर आपस में रंज क्या
मेरी ज़बान की है न तुम्हारी ज़बाँ की है

कुछ ताज़गी हो लज़्ज़त-ए-आज़ार के लिए
हर दम मुझे तलाश नए आसमाँ की है

जाँ-बर भी हो गए हैं बहुत मुझ से नीम-जाँ
क्या ग़म है ऐ तबीब जो पूरी वहाँ की है

हसरत बरस रही है हमारे मज़ार पर
कहते हैं सब ये क़ब्र किसी नौजवाँ की है

वक़्त-ए-ख़िराम-ए-नाज़ दिखा दो जुदा जुदा
ये चाल हश्र की ये रविश आसमाँ की है

फ़ुर्सत कहाँ कि हम से किसी वक़्त तू मिले
दिन ग़ैर का है रात तिरे पासबाँ की है

क़ासिद की गुफ़्तुगू से तसल्ली हो किस तरह
छुपती नहीं वो बात जो तेरी ज़बाँ की है

जौर-ए-रक़ीब ओ ज़ुल्म-ए-फ़लक का नहीं ख़याल
तशवीश एक ख़ातिर-ए-ना-मेहरबाँ की है

सुन कर मिरा फ़साना-ए-ग़म उस ने ये कहा
हो जाए झूट सच यही ख़ूबी बयाँ की है

दामन संभाल बाँध कमर आस्तीं चढ़ा
ख़ंजर निकाल दिल में अगर इम्तिहाँ की है

हर हर नफ़स में दिल से निकलने लगा ग़ुबार
क्या जाने गर्द-ए-राह ये किस कारवाँ की है

क्यूँकि न आते ख़ुल्द से आदम ज़मीन पर
मौज़ूँ वहीं वो ख़ूब है जो सुनते जहाँ की है

तक़दीर से ये पूछ रहा हूँ कि इश्क़ में
तदबीर कोई भी सितम-ए-ना-गहाँ की है

उर्दू है जिस का नाम हमीं जानते हैं ‘दाग़’
हिन्दोस्ताँ में धूम हमारी ज़बाँ की है

कू-ए-बुताँ-street of the idols,क़िस्सा-ख़्वाँ-a story teller, a reciter of tales,पैग़ाम-बर-a messenger, an envoy,लज़्ज़त-ए-आज़ार-pleasure of pain,जाँ-बर-beloved,नीम-जाँ-half dead,हसरत-unfulfilled desire,वक़्त-ए-ख़िराम-ए-नाज़-time of beloved’s promenade,हश्र-doomsday, resurrection, tumult,रविश-pathway/manners-अंदाज़, मिज़ाज, पासबाँ-watchman, sentinel, Guard, Keeper,तशवीश-anxiousness/ apprehension,ख़ातिर-ए-ना-मेहरबाँ-for unkind,नफ़स-soul/ spirit/ self,ख़ुल्द-paradise, heaven,मौज़ूँ-well-balanced, well-adjusted, fit, तदबीर-advice, solution, arrangement, order, सितम-ए-ना-गहाँ-unexpected oppression/tyranny, zaahid-hermit, devotee, abstinent, religious devout.

DAGH DEHLVI
1831-1905
Last of classical poets who celebrated life and love. Famous for his playfulness of words (idioms/ phrases).
source : rekhta.org

Author: nehal

Physician by profession, I like to spend my spare time reading literature and philosophy, getting to know different cultures and exploring various forms of creative expressions,..paintings,music, photography, cinema, theatre, sculpture and of course poetry. I usually write in my mother tongue Gujarati and sometimes in Hindi and English. Nehal’s world is at the crossroads of my inner and outer worlds, hope you like the journey…

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