A poem / કવિતા – Jameela Nishat

A poem / કવિતા – Jameela Nishat

A poem slumbers in my heart, at the centre of my being, and a dim mirror tries to shape it … Continue reading A poem / કવિતા – Jameela Nishat

ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई

ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई जिंदगी की तड़प बढ़ाई गई आईने से बिगड़ … Continue reading ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई