फ़हमीदा रियाज़ – ग़ज़ल

क्यूँ नूर-ए-अबद दिल में गुज़र कर नहीं पाता                 नूर-ए-अबद  = eternal light
सीने की सियाही से नया हर्फ़ लिखा है                       हर्फ़  = word
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ये पैरहन जो मिरी रूह का उतर न सका
तो नख़-ब-नख़ कहीं पैवस्त रेशा-ए-दिल था

 नख़-ब-नख़  = row by row, line by line, little by little

 पैवस्त = absorb, attach

रेशा-ए-दिल = Fibre, nerve, vein of heart
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कभी धनक सी उतरती थी उन निगाहों में
वो शोख़ रंग भी धीमे पड़े हवाओं में

मैं तेज़-गाम चली जा रही थी उस की सम्त
कशिश अजीब थी उस दश्त की सदाओं में

वो इक सदा जो फ़रेब-ए-सदा से भी कम है
न डूब जाए कहीं तुंद-रौ हवाओं में

सुकूत-ए-शाम है और मैं हूँ गोश-बर-आवाज़
कि एक वा’दे का अफ़्सूँ सा है फ़ज़ाओं में

मिरी तरह यूँही गुम-कर्दा-राह छोड़ेगी
तुम अपनी बाँह न देना हवा की बाँहों में

नुक़ूश पाँव के लिखते हैं मंज़िल-ए-ना-याफ़्त
मिरा सफ़र तो है तहरीर मेरी राहों में
– फ़हमीदा रियाज़
(1946 – 2018)

धनक = rainbow

सम्त = path, direction

दश्त = forest

फ़रेब-ए-सदा = imposture, fraud, deceit of voice

तुंद-रौ = strong wind

सुकूत-ए-शाम = quiet of evening

गोश-बर-आवाज़ = ear on sound

अफ़्सूँ = charm, magic spell

गुम-कर्दा-राह = to lead astray, to mislead, to seduce

नुक़ूश = mark

मंज़िल-ए-ना-याफ़्त = unattained destination

तहरीर = writing, description, composition

(source, meanings: rekhta.org)