​नज़्म 

​नज़्म ( zen poem ) पीली पत्तीओं के रास्तो से हो कर पहुंचे हैं; उन मौसमो के मकाम पर, जहां अब तक एक डाल हरी भरी सी है! फूलों और काँटों से परे, तितलीओं और भवरों से अलग, मौसम के बदलते मिज़ाज ठहर गए है वहां! ढूँढते नहीं वे अब बहारो के निशान। डरते नहीं…

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