हम्द – निदा फ़ाज़ली

I simply love this poem for its simplicity of words and high philosophy behind this! Very few writers can achieve this! . . . . . . हम्द नील गगन पर बैठे कब तक चाँद सितारों से झाँकोगे। पर्वत की ऊँची चोटी से कब तक दुनिया को देखोगे। आदर्शो के बन्द ग्रन्थों में कब तक…

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