शब्दों का दुःख : दुर्गा प्रसाद पंडा

शब्दों का दुःख आदमियों की तरहशब्दों के दुःखों की सूची भीख़ूब लंबी है। शब्दों में भी होती हैबहुत कुछ अनकही वेदनाइसीलिए आजकल शब्द सारेनज़र आते हैंनितांत असहाय और विषण्ण। भाव, अर्थ और संलाप के कोलाहल के बाहर रह करशायद वे भी जीना चाहते हैं,निजता और एकांत जीवन। सारा जीवन भावों का भार ढोते-ढोतेझुक कर चल…

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