बातें – વાતો – અમૃતા પ્રીતમ – પ્રતિનિધિ કવિતા અનુવાદ : જયા મહેતા

बातें आ साजन, आज बातें कर लें… तेरे दिल के बाग़ों में हरी चाह की पत्ती-जैसी जो बात जब भी उगी, तूने वही बात तोड़ ली हर इक नाजुक बात छुपा ली, हर एक पत्ती सूखने डाल दी मिट्टी के इस चूल्हे में से हम कोई चिनगारी ढूँढ़ लेंगे एक-दो फूँफें मार लेंगे बुझती लकड़ी…

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