Category: Shahryar शहरयार
ग़ज़ल – शहरयार
बताऊँ किस तरह अहबाब को आँखें जो ऐसी हैं कि कल पलकों से टूटी नींद की किर्चें समेटी हैं सफ़र … Continue reading ग़ज़ल – शहरयार
दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है
दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है नोक-ए-ख़ंजर ही बताएगी कि ख़ूँ कितना है आँधियाँ आईं तो सब लोगों … Continue reading दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है