सफ़र – नेहल
हरे दरख़्तो के चम्पई अंधेरोमें शाम के साये जब उतरते है रात की कहानी छेड देते है जुग्नूओं की महफ़िलमें। … Continue reading सफ़र – नेहल
हरे दरख़्तो के चम्पई अंधेरोमें शाम के साये जब उतरते है रात की कहानी छेड देते है जुग्नूओं की महफ़िलमें। … Continue reading सफ़र – नेहल
વિસ્મૃતી જૂની કેડીઓ પર પડે જાણે કો વિશાળકાય વૃક્ષ ચહેરાઓ હળવેથી સરકતા જાય ભીના કાય પછીતે નામ ની શાહી … Continue reading વિસ્મૃતી – નેહલ