Poems of Kabir- कबीर बानी

  कबीर बानी सन्तो, सहज समाधि भली। साँईते मिलन भयो जा दिन तें, सुरत न अन्त चली।। आँख न मूँदूँ काम न रूँधूँ, काया कष्ट न धारूँ। खुले नैन मैं हँस हँस देखूँ, सुन्दर रूप निहारूँ।। कहूँ सो नाम सुनूँ सो सुमिरन, जो कछु करूँ सो पूजा। गिरह-उद्यान एकसम देखूँ, भाव मिटाऊँ दूजा।। जहँ जहँ…

Read More