गज़ल : ज़ेहरा निगाह

My favourites are 3’rd, 5’th & 6’th sher. छलक रही है मय-ए-नाब तिश्नगी के लिए सँवर रही है तिरी बज़्म बरहमी के लिए नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए जो तीरगी में हुवैदा हो क़ल्ब-ए-इंसाँ से ज़िया-नवाज़ वो शोला है तीरगी के लिए कहाँ…

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