The Song Of The Barren Orange Tree – Poem by Federico García Lorca

Woodcutter. Cut out my shadow. Free me from the torture of seeing myself fruitless. Why was I born among mirrors? The daylight revolves around me. And the night herself repeats me in all her constellations. I want to live not seeing self. I shall dream the husks and insects change inside my dreaming into my…

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नए गीत – फ़ेदेरिको गार्सिया लोर्का

नए गीत तीसरा पहर कहता है- मैं छाया के लिए प्यासा हूँ चांद कहता है- मुझे तारों की प्यास है बिल्लौर की तरह साफ़ झरना होंठ मांगता है और हवा चाहती है आहें मैं प्यासा हूँ ख़ुशबू और हँसी का मैं प्यासा हूँ चन्द्रमाओं, कुमुदनियों और झुर्रीदार मुहब्बतों से मुक्त गीतों का कल का एक…

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