झाडुवाली – ओमप्रकाश वाल्मीकि

सुबह पाँच बजे हाथ में थामे झाड़ू घर से निकल पड़ती है रामेसरी लोहे की हाथ गाड़ी धकेलते हुए खड़ाँग-खड़ाँग की कर्कश आवाज़ टकराती है शहर की उनींदी दीवारों से गुज़रती है सुनसान पड़े चौराहों से करती हुई ऐलान जागो! पूरब दिशा में लाल-लाल सूर्य उगने वाला है नगरपालिका की सुनसान सड़कें धुँधलकों की जमात…

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