अनंत कलरव : निधीश त्यागी

वे सारे फूल जिनके नाम मुझे नहीं पता वे सारे सुर मैं जिन्हें नहीं पहचानता वे सारे शब्द जो डिक्शनरी से भटक गए थे वे सारे सुख जो भूल गए थे अपना ठिकाना वे सारे पाप जिनके शाप की परवाह नहीं वे सारे जंगल जिनके हरा होने का वक़्त क़रीब हो वे सारी बूँदें जो…

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