दिल के काबे में नमाज़ पढ़ – नीरज

दिल के काबे में नमाज़ पढ़ दिल के काबे में नमाज़ पढ़, यहां-वहां भरमाना छोड़। सांस-सांस तेरी अज़ान है, सुबह शाम चिल्लाना छोड़। उसका रुप न मस्जिद में है उसकी ज्योति न मंदिर में जिस मोती को ढूंढ़ रहा तू, वो है दिल के समुन्दर में। मन की माला फेर, हाथ की यह तस्वीह घुमाना…

हम पत्ते तूफ़ान के – नीरज

वेद न कुरान बांचे, ली न ज्ञान की दीक्षा सीखी नहीं भाषा कोई, दी नहीं परीक्षा, दर्द रहा शिक्षक अपना, दुनिया पाठशाला दुःखो की किताब, जिसमें आंसू वर्णमाला। लिखना तुम कहानी मेरी, दिल की कलम से ठाठ है फ़क़ीरी अपना, जनम जनम से। ‘कारवां गुज़र गया’ के कवि डॉ गोपालदास नीरज को ‘हिन्दी काव्य की…