कुछ चुने हुए शेर : मरग़ूब अली

हर्फ़ नाकाम जहाँ होते हैं उन लम्हों में फूल खिलते हैं बहुत बात के सन्नाटे में .. लब पर उगाऊँ उस के धनक फूल क़हक़हे आँखों में उस की फैला समुंदर समेट लूँ .. हर रास्ता कहीं न कहीं मुड़ ही जाएगा रिश्तों के बीच थोड़ा बहुत फ़ासला भी रख .. कुर्सी मेज़ किताबें? बिस्तर…

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आज का चुनिंदा अशआर

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