श्रोता : मनीषा जोषी

श्रोता कविता-पाठ करते वक़्तमेरे गले मेंअचानक से प्यास उठती है। डूब जाती है आवाज़जैसे गिर पड़ी होनदी के ऊपर से उड़ रहे किसी पक्षी केमुँह में पकड़े हुए शिकार-सी। मैं पेश करती हूँ कुछ कविताएँसिवाय उसके! मेरी वह एक प्रिय कविताजो मर रही होती है उस नदी में। कविता श्रवण के लिए बैठे हुए चेहरेजब…

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