सृजन का शब्द

आरम्भ में केवल शब्द थाकिन्तु उसकी सार्थकता थी श्रुति बनने मेंकि वह किसी से कहा जाय मौन को टूटना अनिवार्य थाशब्द का कहा जाना थाताकि प्रलय का अराजक तिमिर व्यवस्थित उजियाले में रूपान्तरित हो ताकि रेगिस्तानगुलाबों की क्यारी बन जाय शब्द का कहा जाना अनिवार्य था।आदम की पसलियों के घाव से इवा के मुक्त अस्तित्व की प्रतिष्ठा के लिएशब्द को…

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