ग़ज़ल – इन्दु श्रीवास्तव

    आए हैं जिस मक़ाम से उसका पता न पूछ रुदादे-सफ़र पूछ मगर रास्ता न पूछ गर हो सके तो देख ये पाँवों के आबले सहरा कहाँ था और कहाँ ज़लज़ला न पूछ वाँ से चले हैं जबसे मुसलसल नशे में है ले जाए किस दयार में हमको नशा न पूछ वाक़िफ़ नहीं है…

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