आज की पंक्तियाँ

उर्दू से लिप्यंतरण : मुमताज़ इक़बाल मुनीर मोमिन सुपरिचित, सम्मानित और समकालीन बलोची कवि हैं। उनकी यहाँ प्रस्तुत बलोची नज़्में उनके मज्मुए ‘गुमशुदा समुंदर की आवाज़’ से चुनी गई हैं। बलोची से उर्दू में इनका तर्जुमा अहसान असग़र ने किया है। source:sadaneera.com

Read More

The Beloved City

Originally posted on Borderless:
Poetry of Munir Momin, translated from Balochi by Fazal Baloch Munir Momin is a contemporary Balochi poet widely cherished for his sublime art of poetry. Meticulously crafted images, linguistic finesse and profound aesthetic sense have earned him a distinguished place in Balochi literature. His poetry speaks through images, more than words.…

Read More

लफ़्ज़… मरजान : मुनीर मोमिन

लफ़्ज़… मरजान मैं नहीं जानता ये शहर ख़ुद को क्यों मेरे अंदर के गलियारों में गुम कर देना चाहता है मैं! अगर मुझसे परिंदा चूगा माँगे मैं उसे दो लफ़्ज़ दूँगा। ये शहर क्यों अपने चराग़ों को आवाज़ की गठरी में बाँध कर मेरे सरहाने रख देता है तुम जानते हो! मेरी ख़्वाबगाह में आवाज़ों…

Read More