जश़्ने सुख़नगोई, ब्लोग के पाँचवे जन्मदिन पर…

जश़्ने सुख़नगोई, ब्लोग के पाँचवे जन्मदिन पर…

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो ( मेयारी – qualitative) … Continue reading जश़्ने सुख़नगोई, ब्लोग के पाँचवे जन्मदिन पर…

बशीर बद्र  (रोशनी के घरौंदे)

बशीर बद्र (रोशनी के घरौंदे)

  शाम आँखों में, आँख पानी में और पानी सराए-फ़ानी में झिलमिलाते हैं कश्तियों में दीए पुल खड़े सो रहे … Continue reading बशीर बद्र (रोशनी के घरौंदे)

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

धूप की चादर मिरे सूरज से कहना भेज दे गुर्बतों का दौर है जाड़ों की शिददत है बहुत …… उन … Continue reading चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

कुछ चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (2)

कुछ चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (2)

हम भी दरया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा ……….. जिस दिन … Continue reading कुछ चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (2)

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (1)

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (1)

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए । – … Continue reading चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (1)