दो कविताएँ – वेणु गोपाल

आ गया था ऐसा वक्त कि भूमिगत होना पड़ा अंधेरे को नहीं मिली कोई सुरक्षित जगह उजाले से ज्यादा। छिप … Continue reading दो कविताएँ – वेणु गोपाल