हरी-हरी दूब पर : अटल बिहारी वाजपेयी

हरी-हरी दूब पर हरी-हरी दूब परओस की बूँदें अभी थीं, अब नहीं हैं। ऐसी खुशियाँ जो हमेशा हमारा साथ दें कभी नहीं थीं, कहीं नहीं हैं।क्वाँर की कोख से फूटा बाल सूर्य जब पूरब की गोद में पाँव फैलाने लगा, तो मेरी बगीची का पत्ता-पत्ता जगमगाने लगा, मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूँ, या उसके…

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