सच इतना भर ही है – अर्चना कुमारी

तलाश जारी है इन दिनों कविताओं में यथार्थ की जीवन के लक्ष्य की मानवता के उपसंहार की सबकी भिन्न रचनाओं में सत्य भी अलग-अलग है यथार्थ देखने सुनने भर अनुभूति शून्य है सब अपना घर,अपने बच्चे अपने लोग,अपना मोहल्ला अपना शहर,अपना राज्यसभा क्रमशः सबसे अन्त में आता है अपना देश विदेश की खबरों में उस…

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