बेजगह – अनामिका

“अपनी जगह से गिर कर कहीं के नहीं रहते केश, औरतें और नाख़ून” – अन्वय करते थे किसी श्लोक को ऐसे हमारे संस्कृत टीचर। और मारे डर के जम जाती थीं हम लड़कियाँ अपनी जगह पर।   जगह? जगह क्या होती है? यह वैसे जान लिया था हमने अपनी पहली कक्षा में ही।   याद था हमें एक-एक क्षण आरंभिक पाठों का– राम, पाठशाला जा ! राधा, खाना पका ! राम,…

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