ઍશ-ટ્રે – અમૃતા પ્રીતમ ऐश ट्रे – अमृता प्रीतम

ऐश ट्रे इलहाम के धुएँ से लेकर सिगरेट की राख तक उम्र की सूरज ढले माथे की सोच बले एक फेफड़ा गले एक वीयतनाम जले… और रोशनी अँधेरे का बदन ज्यों ज्वर में तपे और ज्वर की अचेतना में – हर मज़हब बड़राये हर फ़लसफ़ा लंगड़ाये हर नज़्म तुतलाये और कहना-सा चाहे कि हर सल्तनत…

बातें – વાતો – અમૃતા પ્રીતમ – પ્રતિનિધિ કવિતા અનુવાદ : જયા મહેતા

बातें आ साजन, आज बातें कर लें… तेरे दिल के बाग़ों में हरी चाह की पत्ती-जैसी जो बात जब भी उगी, तूने वही बात तोड़ ली हर इक नाजुक बात छुपा ली, हर एक पत्ती सूखने डाल दी मिट्टी के इस चूल्हे में से हम कोई चिनगारी ढूँढ़ लेंगे एक-दो फूँफें मार लेंगे बुझती लकड़ी…

शहर -अमृता प्रीतम – चुनी हुई कवितायें

  मेरा शहर एक लम्बी बहस की तरह है सड़कें – बेतुकी दलीलों-सी… और गलियाँ इस तरह जैसे एक बात को कोई इधर घसीटता कोई उधर हर मकान एक मुट्ठी-सा भिंचा हुआ दीवारें-किचकिचाती सी और नालियाँ, ज्यों मुँह से झाग बहता है यह बहस जाने सूरज से शुरू हुई थी जो उसे देख कर यह…

મારું સરનામું – અમૃતા પ્રીતમ, मेरा पता – अमृता प्रीतम

તારા પ્રેમનું એક ટીપું એમાં ભળી ગયું હતું તેથી મેં જિંદગીની બધી કડવાશ પી લીધી…. . . . . . . . મારું સરનામું આજે મેં મારા ઘરનો નંબર ભૂંસી નાખ્યો અને ગલીને માથે લાગેલું ગલીનું નામ હઠાવી નાંખ્યું છે અને પ્રત્યેક રસ્તાની દિશાનું નામ ભૂંસી નાંખ્યું છે પરંતુ તમારે જો ખરેખર મને પામવી હોય…