कुछ चुने हुए शेर : ​सलीम कौसर

बिछड़ती और मिलती साअतों के दरमियान इक पल यही इक पल बचाने के लिए सब कुछ गँवाया है                       साअतों = times : : : साँस लेने से भी भरता नहीं सीने का ख़ला जाने क्या शय है जो बे-दख़्ल हुई है मुझ में  …

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अभिव्यक्ति का प्रश्न – दुष्यंत कुमार ( સરળ ગુજરાતી સાર સાથે )

अभिव्यक्ति का प्रश्न प्रश्न अभिव्यक्ति का है, मित्र! किसी मर्मस्पर्शी शब्द से या क्रिया से, मेरे भावों, अभावों को भेदो प्रेरणा दो! यह जो नीला ज़हरीला घुँआ भीतर उठ रहा है, यह जो जैसे मेरी आत्मा का गला घुट रहा है, यह जो सद्य-जात शिशु सा कुछ छटपटा रहा है, यह क्या है? क्या है…

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काश ऐसा होता – लीना टिब्बी

काश ऐसा होता कि ईश्वर मेरे बिस्तर के पास रखे पानी भरे गिलास के अन्दर से बैंगनी प्रकाश पुंज-सा अचानक प्रकट हो जाता… काश ऐसा होता कि ईश्वर शाम की अजान बन कर हमारे ललाट से दिन भर की थकान पोंछ देता… काश ऐसा होता कि ईश्वर आसूँ की एक बूंद बन जाता जिसके लुढ़कने…

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हलकी नीली यादें – Memories Of Light Blue

हलकी नीली यादें ओ विस्मृति के पहाड़ों में निर्वासित मेरे लोगो ! ओ मेरे रत्नों और जवाहरातो ! क्यों ख़ामोशी के कीचड़ में सोए हुए हो तुम ? ओ मेरे आवाम ! गुम हो चुकी हैं तुम्हारी यादें तुम्हारी हलकी नीली, वो आसमानी यादें । हमारे दिमागों में गाद भर चुकी है और विस्मरण के…

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सितारे – Stars:​ Giuseppe Ungaretti

हमारे ऊपर एक बार फिर जलती हैं कपोल-कथाएँ हवा के पहले झोंके में ही झर जाएँगी पत्तियों के साथ किन्तु अगली साँस के साथ वापस लौट आएगी एक नई झिलमिलाहट – उंगारेत्ती (8 फ़रवरी 1888- 2 जून 1970) अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुरेश सलिल ……………….. Stars They come back high to burn the tales. They…

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Every Song – हर गीत

Every Song Every song is the remains of love. Every light the remains of time. A knot of time. And every sigh the remains of a cry. Federico García Lorca Translated by A. S. Kline © Copyright 2007 All Rights Reserved ……………….. हर गीत चुप्पी है प्रेम की हर तारा चुप्पी है समय की समय…

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चिराग़ जलते हैं – सूर्यभानु गुप्त

जिनके अंदर चिराग़ जलते हैं, घर से बाहर वही निकलते हैं। बर्फ़ गिरती है जिन इलाकों में, धूप के कारोबार चलते हैं। दिन पहाड़ों की तरह कटते हैं, तब कहीं रास्ते पिघलते हैं। ऐसी काई है अब मकानों पर, धूप के पाँव भी फिसलते हैं। खुदरसी उम्र भर भटकती है, लोग इतने पते बदलते हैं।…

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कुछ चुने हुए शेर:​ सूर्यभानु गुप्त

जिनके नामों पे आज रस्ते हैं वे ही रस्तों की धूल थे पहले …… अन्नदाता हैं अब गुलाबों के जितने सूखे बबूल थे पहले …… मूरतें कुछ निकाल ही लाया पत्थरों तक अगर गया कोई ……. यहाँ रद्दी में बिक जाते हैं शाइर गगन ने छोड़ दी ऊँचाइयाँ हैं कथा हर ज़िंदगी की द्रोपदी-सी बड़ी…

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हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ – सूर्यभानु गुप्त

हैज़ा, टी. बी.,चेचक से मरती थी पहले दुनिया मन्दिर, मसजिद, नेता, कुरसी हैं ये रोग अभी के ….. इक मोम के चोले में धागे का सफ़र दुनिया, अपने ही गले लग कर रोने की सज़ा पानी। …….. हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ मैं भी…

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The Song Of The Barren Orange Tree – Poem by Federico García Lorca

Woodcutter. Cut out my shadow. Free me from the torture of seeing myself fruitless. Why was I born among mirrors? The daylight revolves around me. And the night herself repeats me in all her constellations. I want to live not seeing self. I shall dream the husks and insects change inside my dreaming into my…

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नए गीत – फ़ेदेरिको गार्सिया लोर्का

नए गीत तीसरा पहर कहता है- मैं छाया के लिए प्यासा हूँ चांद कहता है- मुझे तारों की प्यास है बिल्लौर की तरह साफ़ झरना होंठ मांगता है और हवा चाहती है आहें मैं प्यासा हूँ ख़ुशबू और हँसी का मैं प्यासा हूँ चन्द्रमाओं, कुमुदनियों और झुर्रीदार मुहब्बतों से मुक्त गीतों का कल का एक…

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नई आवाज – रामधारी सिंह “दिनकर”

कभी की जा चुकीं नीचे यहाँ की वेदनाएँ, नए स्वर के लिए तू क्या गगन को छानता है ? [1] बताएँ भेद क्या तारे ? उन्हें कुछ ज्ञात भी हो, कहे क्या चाँद ? उसके पास कोई बात भी हो। निशानी तो घटा पर है, मगर, किसके चरण की ? यहाँ पर भी नहीं यह…

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नज़्म – अमीक़ हनफ़ी (સરળ ગુજરાતી ભાવાનુવાદ સાથે)

ज़ात का आईना-ख़ाना जिस में रौशन इक चराग़-ए-आरज़ू चार-सू ज़ाफ़रानी रौशनी के दाएरे मुख़्तलिफ़ हैं आईनों के ज़ाविए एक लेकिन अक्स-ए-ज़ात; इक इकाई पर उसी की ज़र्ब से कसरत-ए-वहदत का पैदा है तिलिस्म ख़ल्वत-ए-आईना-ख़ाना में कहीं कोई नहीं सिर्फ़ मैं! मैं ही बुत और मैं ही बुत-परस्त! मैं ही बज़्म-ए-ज़ात में रौनक़-अफ़रोज़ जल्वा-हा-ए-ज़ात को देता…

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पंचभूतों ने जो मुझे सिखलाया – के० सच्चिदानंदन

धरती ने मुझे सिखलाया है- सब कुछ स्वीकारना सब कुछ के बाद सबसे परे हो जाना हर ऋतु में बदलना यह जानते हुए कि स्थिरता मृत्यु है चलते चले जाना है अन्दर और बाहर। अग्नि ने मुझे सिखलाया है- तृष्णा में जलना नाचते-नाचते हो जाना राख दुख से होना तपस्वी काली चट्टानों के दिल और…

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कुआँ…नारी जीवन की अभिव्यक्ति / मधु गजाधर

कुआँ मैं एक कुआँ हूँ, गहरा कुआँ , मेरे अन्दर के अँधेरे में भी शांति है , शीतलता है ,… क्योंकि मैं जल से ओत प्रोत हूँ, जल… प्रेम का जल , अपनत्व का जल, ममता का जल, संस्कार का जल, श्रधा के समर्पण का जल, जल ही जल , चहुँ और मेरे जल ही…

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Those Bells Are Driving Me Crazy- चढ़न चरी कई

Those Bells Are Driving Me Crazy Those bells are driving me crazy How can I sleep? Ten times a day I pine for him I’ll wear the chains of his love Till death Standing at the edge They cry out, ‘My love!’ But they love only their lives Some claim, ‘I’m all yours’ But wet…

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Poems – Dunya Mikhail

Dunya Mikhail was born in Iraq (Baghdad) in 1965 and came to the United States thirty years later. She’s renowned for her subversive, innovative, and satirical poetry. After graduation from the University of Baghdad, she worked as a journalist and translator for the Baghdad Observer. Facing censorship and interrogation, she left Iraq, first to Jordan…

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न्यूयार्क में एक तितली – A Butterfly in New York

बग़दाद के अपने बग़ीचे में मैं अक्सर भागा करता था उसके पीछे मगर वह उड़कर दूर चली जाती थी हमेश। आज तीन दशकों बाद एक दूसरे महाद्वीप में वह आकर बैठ गई मेरे कन्धे पर। नीली समन्दर के ख़यालों या आख़िरी साँसें लेती किसी परी के आँसुओं की तर॥ उसके पर स्वर्ग से गिरती दो…

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मेरा एकांत -सुरेश जोशी

मेरा एकांत मैं देता हूं तुम्हें एकांत— हंसी के जमघट के बीच एक अकेला अश्रु शब्दों के शोर के बीच एक बिंदु भर मौन यदि तुम्हें सहेजकर रखना है तो यह रहा मेरा एकांत— विरह सम विशाल अंधेरे सम नीरंध्र तुम्हारी उपेक्षा जितना गहरा जिसका साक्ष्य न सूर्य, न चंद्रमा ऐसा केवल एकांतातीत एकांत नहीं,…

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नज़्म – साहिर लुधियानवी

अश्कों में जो पाया है, वो गीतों में दिया है इस पर भी सुना है, कि ज़माने को गिला है जो तार से निकली है, वो धुन सबने सुनी है जो साज़ पे गुज़री है, वो किस दिल को पता है …… ज़िन्दगी से उन्स है हुस्न से लगाव है धड़कनों में आज भी इश़्क…

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