उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता

उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता हमेशा हो सितारा हम-सफ़र आसाँ नहीं होता जो आँखों ओट है चेहरा उसी को देख कर जीना ये सोचा था कि…… Read more “उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता”

दो कविताएँ – वेणु गोपाल

आ गया था ऐसा वक्त कि भूमिगत होना पड़ा अंधेरे को नहीं मिली कोई सुरक्षित जगह उजाले से ज्यादा। छिप गया वह उजाले में कुछ यूं कि…… Read more “दो कविताएँ – वेणु गोपाल”

ग़ज़ल – मुसव्विर सब्ज़वारी

कोई ख़्वाब सर से परे रहा ये सफ़र सराब-ए-सफ़र रहा मैं शनाख़्त अपनी गँवा चुका गई सूरतों की तलाश में सराब-ए-सफ़र – mirage of journey, शनाख़्त -…… Read more “ग़ज़ल – मुसव्विर सब्ज़वारी”

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ – निदा फ़ाज़ली

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा कुछ होता है यूँ भी रास्ता खुलता नहीं कहीं…… Read more “देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ – निदा फ़ाज़ली”

एक आशीर्वाद – दुष्यंत कुमार

जा तेरे स्वप्न बड़े हों। भावना की गोद से उतर कर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें। चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये रूठना मचलना सीखें। हँसें…… Read more “एक आशीर्वाद – दुष्यंत कुमार”

लम्हे

लम्हे दिन की गठरी खोल समेट रही हूँ होले होले गिरते लम्हे बूँदों-से छलककर  टपकते लम्हे पत्तों-से गिरते, उठते लम्हे फूलों-से खिलते, मुरझाते लम्हे हवाओं-से बहते, हाथमें…… Read more “लम्हे”

ग़ज़ल – दाग़ देहलवी

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता दाग़ देहलवी काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है मुझ को ख़बर नहीं मिरी मिट्टी कहाँ…… Read more “ग़ज़ल – दाग़ देहलवी”