आज का चुनिंदा अशआर

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आज का चुनिंदा अशआर

पैकर = body

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कुछ चुने हुए शेर : मरग़ूब अली

हर्फ़ नाकाम जहाँ होते हैं उन लम्हों में फूल खिलते हैं बहुत बात के सन्नाटे में .. लब पर उगाऊँ उस के धनक फूल क़हक़हे आँखों में उस की फैला समुंदर समेट लूँ .. हर रास्ता कहीं न कहीं मुड़ ही जाएगा रिश्तों के बीच थोड़ा बहुत फ़ासला भी रख .. कुर्सी मेज़ किताबें? बिस्तर…

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आज का चुनिंदा अशआर

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आज का चुनिंदा अशआर

ख़ुलूस-ए-दिल = purity of heart सज्दा = To bow down in devotion and faith जबीं = forehead

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आज का चुनिंदा अशआर

अब्र = cloud बातिन = the mind, the heart मंज़र = spectacle लहज़ा-ए-इदराक = moment of senses, awareness

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आज का चुनिंदा अशआर

तजल्ली = splendour, manifestation simple explanation : This whole world( tavern ) is such a splendour, such a manifestation of ‘his’ love / beauty/ light, that real joy, real pleasure is not in drinking but in losing one’s self in this brilliance. Sufi poetry.

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Daily Musings : 97

हर्फ़-ए-ना-गुफ़्ता = unsaid word ला-फ़ानी = immortal simple translation : let me write silence on the lips of ‘sher’ (verse) let me make immortal ‘the unsaid word’. Silence speaks more than words, if we can learn the art of reading silence, our heart will be filled with so many immortal words. Be it a word…

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Daily Musings : 96

जा = place जल्वा-ए-माशूक़ = vision of the beloved शौक़-ए-दीदार = pleasure of seeing नज़र = vision simple translation : There is no place where you cannot see the beloved, if you wish to have pleasure of seeing him/her, develop your vision. In other words; when you have developed your vision to see, you can…

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Daily Musings : 95

हरीम-ए-इश्क़ = sacred space of love हस्ती = existence simple translation: your existence itself is a crime in a sacred space of love do not enter here with your ‘ego’ . in other words, when you’re in love, you do not exist separately from your beloved, you’re one with him. So your ego, your’ head’,…

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Daily Musings : 66

Translation : तुख़्म = seed सर्व-ए-चराग़ाँ = graceful display of lamps, चराग़ों से जगमगाता हुआ पेड़ if time permits, (if Time will give me freedom) I will show (them this) amusement My each heart sore is a seed of a tree, illuminated with lamps. meanings, source : rekhta.org

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Daily Musings : 65

*मुनव्वर = प्रकाशमान Translation : There is light everywhere ( I see ) Who is the luminous ( beaming with light ) one in my eyes (?)

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Daily Musings : 64

Simple Translation : ( I saw ) My soul (my life ) melting in each moment Spent night drop by drop ( crying, in grief ) My hands shaking, quivering ( But) ( I came out of all this) on my own, I took control of myself. ~ Kishwar Naheed Translation : Nehal.

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कुछ चुने हुए शेर, ग़ज़ल – राहत इंदौरी

मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए * ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो मेयारी = qualitative * आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के *…

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कुछ अशआर, नज़्म – निदा फ़ाज़ली

यूँ लग रहा है जैसे कोई आस-पास है वो कौन है जो है भी नहीं और उदास है  मुमकिन है लिखने वाले को भी ये ख़बर न हो क़िस्से में जो नहीं है वही बात ख़ास है  चलता जाता है कारवान-ए-हयात  इब्तिदा क्या है इंतिहा क्या है  ख़ुद से मिलने का चलन आम नहीं है वर्ना  अपने…

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कुछ चुने हुए शेर : ​सलीम कौसर

बिछड़ती और मिलती साअतों के दरमियान इक पल यही इक पल बचाने के लिए सब कुछ गँवाया है                       साअतों = times : : : साँस लेने से भी भरता नहीं सीने का ख़ला जाने क्या शय है जो बे-दख़्ल हुई है मुझ में  …

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कुमार पाशी – चुनिंदा अशआर

हवा के रंग में दुनिया पे आश्कार हुआ मैं क़ैद-ए-जिस्म से निकला तो बे-कनार हुआ आश्कार = clear, manifest, visible, व्यक्त, प्रकट, ज़ाहिर, स्पष्ट, साफ़ बे-कनार = boundless, without a shore, infinite **** पढ़ के हक़ाएक़ कहीं न अंधा हो जाऊँ मुझ को अब हो सके तो कुछ अफ़्साने दो हक़ाएक़ = facts, realities ****…

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चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

धूप की चादर मिरे सूरज से कहना भेज दे गुर्बतों का दौर है जाड़ों की शिददत है बहुत …… उन अँधेरों में जहाँ सहमी हुई थी ये ज़मीं रात से तनहा लड़ा, जुगनू में हिम्मत है बहुत ……. तारों भरी पलकों की बरसायी हुई ग़ज़लें है कौन पिरोये जो बिखरायी हुई ग़ज़लें ……… पास से…

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अहमद फ़राज़ – चुनिंदा अशआर

चुनिंदा अशआर शायद कोई ख्वाहिश रोती रहती है मेरे अन्दर बारिश होती रहती है। …. मैं चुप रहा तो सारा जहाँ था मेरी तरफ हक बात की तो कोई कहाँ था मेरी तरफ। …. मैंने सितमगरों को पुकारा है खुद ‘फराज़’ वरना किसी का ध्यान कहाँ था मेरी तरफ। …. कितना आसाँ था तेरे हिज्र…

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कुछ चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (2)

हम भी दरया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा ……….. जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है आँखों ने कही मील का पत्थर नहीं देखा ………. कही यूँ भी आ मिरी आँखमें कि मिरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ दे,…

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मीर तक़ी मीर

मीर तक़ी मीर  (1722-23  –   1810) उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ‘ ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है।  कुछ  अशआर दिल से रुख़सत हुई कोई ख़्वाहिश गिर्या कुछ बे-सबब नहीं आता     गिर्या- weeping, lamentation हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे उन को देखा तो ख़ुदा याद आया  …

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चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (1)

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए । – – – – – – – – – – उसके लिए तो मैंने यहा तक दुआयें की मेरी तरह से कोई उसे चाहता भी हो । – – – – – — – आखो में…

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