आज की पंक्तियाँ

उर्दू से लिप्यंतरण : मुमताज़ इक़बाल

मुनीर मोमिन सुपरिचित, सम्मानित और समकालीन बलोची कवि हैं। उनकी यहाँ प्रस्तुत बलोची नज़्में उनके मज्मुए ‘गुमशुदा समुंदर की आवाज़’ से चुनी गई हैं। बलोची से उर्दू में इनका तर्जुमा अहसान असग़र ने किया है।

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