कौन सी है ये गली : नेहल

उदासी के काले, धूंधले, ठंडे थपेडों
के बीच
ये कौन सा सफ़र बीत रहा है?
एक संकरी गली से
गुज़र रहे है
जिसका कोई अंत
नज़र नहीं आ रहा
शब्द अपने हाथ-पाँव तूडवा के
बैठे है
और माइने ढूँढने लगे हैं
अपने वजूद को
दिशाशून्यता कहीं 
दिशाहीनता
ना बन जाए!
~ नेहल