From the Books… : ( निठल्ले की डायरी )

From the Books I am Reading…

“निर्णय होने तक कि क्या बुरा है और क्या अच्छा, अकर्म ही चलने दो।”

“जिसे जीवित रहना है और देश की सेवा करनी है, वह फाइलें कभी पूरी नहीं करेगा।जिसकी टेबिल पर फाइलों का जितना ब़डा ढेर होगा, वह उतना ही दीर्घायु होगा और उतना ही ब़डा देशसेवक होगा।”

“कल से यह मेरा दखल-अभियान शुरु होगा।मैं काम नहीं करुंगा, सिर्फ दूसरे के काम में दखल दूँगा।”

उपदेश- अगर आप चाहते हो कि कोई तुम्हें हमेशा याद रखे, तो उसके दिल में प्यार पैदा करने का झंझट न उठाओ। उसका कोई स्केंडल मुठ्ठी में रखो। वह सपने में भी प्रेमिका के बाद तुम्हारा चेहरा देखेगा।

“वह पैसा खाता है न! गाली वही दे सकता है, जो रोटी खाता है।पैसा खानेवाला सबसे डरता है।”

“हाय-हाय, इस देश में लड़की के दिल में जाना हो, तो माँ-बाप के दिल की राह से जाना होता है। माँ-बाप की सेवा करने में ही प्रेमी के अंजर-पंजर ढीले हो जाते हैं ? शीरी के बाप ने कह दिया कि पहाड़ में से नहर खोद लाओ, तो वह उल्लू का पठ्ठा फरहाद कुदाली उठाकर खोदने ही लगा।”

“एम. ए. करने से नौकरी मिलने तक जो काम किया जाता है, उसे रिसर्च कहते हैं। वह दफ्तर जाने के पहले किया गया हरि-स्मरण है। इसीलिये अधिकांश शोध-प्रबंध विष्णुसहस्त्रनाम हैं—यानी उनमें एक ही बात हजार तरह से कही जाती है।”

“आत्मविश्वास धन का होता है, विद्या का भी और बल का भी, पर सबसे बड़ा आत्मविश्वास नासमझी का होता है।”

~ हरिशंकर परसाई (निठल्ले की डायरी, 2016)