सिर्फ तुम्हारे लिए… सिमोन : शुभम श्री

सिर्फ तुम्हारे लिए… सिमोन

(4)

जानती हो सिमोन,

मैं अकसर सोचती हूँ
सोचती क्या, चाहती हूँ

पहुँचाऊँ
कुछ प्रतियाँ ‘द सेकंड सेक्स’ की

उन तक नहीं
जो अपना ब्लॉग अपडेट कर रही हैं

मीटिंग की जल्दी में हैं
बहस में मशगूल हैं

‘सोचनेवाली औरतों’ तक नहीं

उन तक

जो एक अदद दूल्हा खरीदे जाने के इंतजार
में

बैठी हैं
कई साल हो आए जिन्हें
अपनी उम्र उन्नीस बताते हुए

चाहती हूँ

किसी दिन कढ़ाई करते
क्रोशिया चलते, सीरियल देखते

चुपके से थमा दूँ एक प्रति
छठे वेतन आयोग के बाद

महँगे हो गए हैं लड़के
पूरा नहीं पड़ेगा लोन

प्रार्थना कर रही हैं वे
सोलह सोमवार

पाँच मंगलवार सात शनिवार
निर्जल.,.निराहार…

चाहती हूँ

वे पढ़ें

बृहस्पति व्रत कथा के बदले
तुम्हें, तुम्हारे शब्दों को
जानती हो
डर लगता है
पता नहीं

जब तक वे खाना बनाने
सिलाई करने, साड़ियों पर फूल बनाने के
बीच
वक़्त निकालें
तब तक

संयोग से कहीं सौदा पट जाए
और
तीस साल की उम्र में

इक्कीस वर्षीय आयुष्मती कुमारी क
परिणय सूत्र में बँधने के बाद

‘द सेकंड सेक्स’ के पन्नों में
लपेट कर रखने लगें अपनी चूड़ियाँ

तब क्‍या होगा, सिमोन ?

………….
JUST FOR YOU, SIMONE.

(4)

Do you know, Simone,

I often think
no, not think: want

to send
a few copies of The Second Sex

not to the women
who are updating their blogs

in a hurry for a meeting
wrapped up in debate

not to ‘thinking women’

No, to those

who sit

waiting for a groom to be bought for them

They’ve already claimed
a few years running
to be nineteen

I want

someday, when they’re embroidering
crocheting
watching serials

to quietly hand over a copy

Since the pay hikes of the Sixth Pay Commission
boys have gotten expensive
Loans won’t cover the cost

Those women pray
sixteen Mondays

five Tuesdays seven Saturdays
without water without food

I want

them to read

instead of the tale of the Thursday Fast
you, your words

You know
I am afraid
I don’t know

when
they’ve spent
their time

cooking
sewing
embroidering flowers on saris

by then
at the age of thirty
if by chance the deal
has been sealed

bound in the marriage sutra
pretending to be a girl of twenty-one

if they begin to store their bangles
wrapped
in the pages of The Second Sex

what then, Simone?

© 2011, Shubham Shree
From: Naya Gyanodaya, No. 98, April, 2011

© Translation: 2017, Daisy Rockwell
From: Asymptote, Winter 2017

source : poetryinternational.org