गीत मेरे : हरिवंशराय बच्चन

 गीत मेरे

गीत मेरे, देहरी का दीप-सा बन।

एक दुनिया है हृदय में, मानता हूँ,
वह घिरी तम से, इसे भी जानता हूँ,
छा रहा है किंतु बाहर भी तिमिर-घन,
गीत मेरे, देहरी का द‍ीप-सा बन।

प्राण की लौ से तुझे जिस काल बारुँ,
और अपने कंठ पर तुझको सँवारूँ,
कह उठे संसार, आया ज्‍योति का क्षण,
गीत मेरे, देहरी का द‍ीप-सा बन।

दूर कर मुझमें भरी तू कालिमा जब,
फैल जाए विश्‍व में भी लालिमा तब,
जानता सीमा नहीं है अग्नि का कण,
गीत मेरे, देहरी का द‍ीप-सा बन।

जग विभामय न तो काली रात मेरी,
मैं विभामय तो नहीं जगती अँधेरी,
यह रहे विश्‍वास मेरा यह रहे प्रण,
गीत मेरे, देहरी का द‍ीप-सा बन।

हरिवंशराय बच्चन ( 1907-2003 )

Photo by Bhargava Marripati on Pexels.com