उनको प्रणाम : नागार्जुन

उनको प्रणाम

जो नहीं हो सके पूर्ण–काम 
मैं उनको करता हूँ प्रणाम । 

कुछ कंठित औ’ कुछ लक्ष्य–भ्रष्ट 
जिनके अभिमंत्रित तीर हुए; 
रण की समाप्ति के पहले ही 
जो वीर रिक्त तूणीर हुए ! 
उनको प्रणाम ! 

जो छोटी–सी नैया लेकर 
उतरे करने को उदधि–पार; 
मन की मन में ही रही¸ स्वयं 
हो गए उसी में निराकार ! 
उनको प्रणाम ! 

जो उच्च शिखर की ओर बढ़े 
रह–रह नव–नव उत्साह भरे; 
पर कुछ ने ले ली हिम–समाधि 
कुछ असफल ही नीचे उतरे ! 
उनको प्रणाम ! 

एकाकी और अकिंचन हो 
जो भू–परिक्रमा को निकले; 
हो गए पंगु, प्रति–पद जिनके 
इतने अदृष्ट के दाव चले ! 
उनको प्रणाम ! 

कृत–कृत नहीं जो हो पाए; 
प्रत्युत फाँसी पर गए झूल 
कुछ ही दिन बीते हैं¸ फिर भी 
यह दुनिया जिनको गई भूल ! 
उनको प्रणाम ! 

थी उम्र साधना, पर जिनका 
जीवन नाटक दु:खांत हुआ; 
या जन्म–काल में सिंह लग्न 
पर कुसमय ही देहांत हुआ ! 
उनको प्रणाम ! 

दृढ़ व्रत औ’ दुर्दम साहस के 
जो उदाहरण थे मूर्ति–मंत ? 
पर निरवधि बंदी जीवन ने 
जिनकी धुन का कर दिया अंत ! 
उनको प्रणाम ! 

जिनकी सेवाएँ अतुलनीय 
पर विज्ञापन से रहे दूर 
प्रतिकूल परिस्थिति ने जिनके 
कर दिए मनोरथ चूर–चूर ! 
उनको प्रणाम !

  • नागार्जुन ( वैद्यनाथ मिश्र 1911-1998 )
  • Vaidyanath Mishra, better known by his pen name Nagarjun, was a Hindi and Maithili poet , He started his literary career with Maithili poems by the pen-name of Yatri (यात्री) in the early 1930s. He has also penned a number of novels, short stories, literary biographies and travelogues, and was known as Janakavi- the People’s Poet. He is regarded as the most prominent protagonist of modernity in Maithili. He was proficient in SanskritPali, Prakrit and Bengali languages. Because of the breadth of his poetry, Nagarjun is considered the only Hindi poet after Tulsidas to have an audience ranging from the rural sections of society to the elite. He effectively freed poetry from the bounds of elitism.
  • Nagarjun was given the Sahitya Akademi Award in 1969 for his historic book Patarheen Nagna Gachh, and the ‘Bharat Bharati Award’ by the Uttar Pradesh government for his literary contributions in 1983. He was also honoured by the Sahitya Akademi Fellowship, India’s highest literary award for lifetime achievement, in 1994.[source:wikipedia]