कुछ ख़याल कुछ लब़्ज़

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दर्दकी सुराही, भर के आँसुओ से जीओ
मॅय ज़िंदगीका समज़ के उसे पीओ।
भरके आँखोमें रोज़ सपनोकी रोशनी
दिवाली अपनी अमावसोकी करके जीओ ।

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बुइने लगी है
आग ज़िंदगीकी,मेरे दोस्त
फूंकदो एक-दो नज़्म
शायद लौ थोडी तेज़ हो जाए।

-नेहल